Connect with us

Tricity

निजी मालिकों को बड़ा झटका, बीड़ फिरोजाड़ी, कामी, सुल्तानपुर और जलौली समेत 8 गांवों की ₹2,500 करोड़ की 810 एकड़ प्राइम जमीन सरकार के नाम |

Published

on

पंचकूला की करीब 810 एकड़ प्राइम जमीन को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद में निजी जमीन मालिकों को बड़ा झटका लगा है। अंबाला डिविजनल कमिश्नर की अदालत ने निजी मालिकों के नाम दर्ज म्यूटेशन रद्द करते हुए पूरी जमीन हरियाणा सरकार के नाम दर्ज करने का आदेश दिया है।

यह विवाद पंचकूला जिले के सात गांवों में फैली उस विशाल जमीन से जुड़ा है, जो कभी पूर्व जमींदार सरदार भगवंत सिंह की संपत्ति मानी जाती थी। यह मामला पिछले छह दशकों से अधिक समय से विभिन्न अदालतों, राजस्व अधिकारियों और सरकारी विभागों के बीच लंबित रहा है।

अंबाला डिविजनल कमिश्नर संजीव वर्मा ने यह आदेश देहरादून निवासी आशा सिंह द्वारा दायर एग्जीक्यूटिव रिवीजन याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया। आशा सिंह, सरदार भगवंत सिंह की कानूनी वारिसों में शामिल हैं।

डिविजनल कमिश्नर ने अपने आदेश में कलेक्टर एग्रेरियन, पंचकूला को निर्देश दिया है कि सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर देकर पूरे मामले की दोबारा जांच की जाए और दो महीने के भीतर नया निर्णय लिया जाए।

810 एकड़ जमीन के म्यूटेशन रद्द

आदेश के अनुसार करीब 810 एकड़ 5 कनाल 7 मरला जमीन, जो फिलहाल निजी व्यक्तियों और मालिकों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है, अब हरियाणा सरकार के नाम म्यूटेट की जाएगी।

डिविजनल कमिश्नर ने कहा कि यह पूरी जमीन हरियाणा सीलिंग ऑन लैंड होल्डिंग्स एक्ट, 1972 की धारा 12(3) के तहत राज्य सरकार में निहित होती है।

आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि करीब 583 एकड़ 3 कनाल 16 मरला जमीन पहले ही राज्य सरकार के नाम दर्ज की जा चुकी थी। अब बची हुई 810 एकड़ से अधिक जमीन भी सरकार के अधिकार में जाएगी।

कमिश्नर ने अपने आदेश में कहा कि निजी मालिकों के नाम की गई म्यूटेशन कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है और इन्हें तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाता है।

क्या होता है म्यूटेशन?

राजस्व प्रशासन में म्यूटेशन का अर्थ किसी संपत्ति या जमीन के मालिकाना हक में हुए बदलाव को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करना होता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर बिक्री, विरासत, बंटवारे, अदालत के आदेश या अन्य कानूनी प्रक्रिया के बाद की जाती है।

हालांकि म्यूटेशन अपने आप में अंतिम मालिकाना हक का प्रमाण नहीं होता, लेकिन यह राजस्व रिकॉर्ड, टैक्स निर्धारण और सरकारी दस्तावेजों में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

यह मामला पूर्व जमींदार सरदार भगवंत सिंह की करीब 1,396 एकड़ जमीन से जुड़ा हुआ है। यह जमीन वर्तमान पंचकूला जिले के सात गांवों में फैली हुई थी।

विवादित जमीन बीड़ फिरोजाड़ी (बिर फिरोजारी), कामी, बरवाला, संगराना, जलौली, बीड़ बाबूपुर, भरेली और फतेहपुर वीरान गांवों में स्थित है।

सरदार भगवंत सिंह का निधन 30 अक्टूबर 1960 को हुआ था। उनके पीछे सात कानूनी वारिस थे। हालांकि उनकी मृत्यु के बाद भी पंजाब सिक्योरिटी ऑफ लैंड टेन्योर एक्ट, 1953 के तहत उनकी जमीन को लेकर सरप्लस भूमि कार्यवाही जारी रही।

सरप्लस भूमि कार्यवाही उस जमीन को निर्धारित करने के लिए शुरू की जाती थी, जो कानून द्वारा तय सीमा से अधिक मानी जाती थी। ऐसी अतिरिक्त जमीन को सरकार अपने अधिकार में ले सकती थी।

60 साल से ज्यादा समय तक चलता रहा मामला

डिविजनल कमिश्नर ने अपने 26 मई के आदेश में कहा कि यह मामला कई बार अलग-अलग स्तरों पर तय किया गया, लेकिन उच्च राजस्व अधिकारियों और अदालतों द्वारा बार-बार वापस भेजे जाने के कारण अंतिम फैसला नहीं हो पाया।

आदेश में कहा गया कि इस लंबे कानूनी विवाद के चलते सरप्लस भूमि कार्यवाही छह दशक से अधिक समय तक लंबित रही।

कमिश्नर ने 31 मार्च 2020 के उस आदेश का भी उल्लेख किया जिसमें कलेक्टर एग्रेरियन, पंचकूला ने सरदार भगवंत सिंह के प्रत्येक कानूनी वारिस को 30 स्टैंडर्ड एकड़ जमीन आवंटित करने का निर्णय लिया था।

उस आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि 1958 के बाद जमीन खरीदने वाले व्यक्तियों को किसी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती।

हाईकोर्ट ने भी दिए थे नए सिरे से निर्धारण के आदेश

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 24 फरवरी 2023 को कलेक्टर एग्रेरियन, पंचकूला को निर्देश दिया था कि सरप्लस भूमि का नए सिरे से निर्धारण एक वर्ष के भीतर कानून के अनुसार किया जाए।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद आशा सिंह ने 14 मार्च 2023 को फाइनेंशियल कमिश्नर, रेवेन्यू के समक्ष आवेदन दायर किया। इसमें मांग की गई कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन से पहले 1,396 एकड़ जमीन से संबंधित राजस्व रिकॉर्ड में सरदार भगवंत सिंह और उनके कानूनी वारिसों के नाम सही तरीके से दर्ज किए जाएं।

इसके बाद राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव की प्रक्रिया शुरू हुई। हालांकि 4 जनवरी 2024 को कलेक्टर एग्रेरियन ने अपने पूर्व आदेश वापस लेते हुए रिकॉर्ड में किए गए बदलावों को निरस्त करने के निर्देश जारी कर दिए।

यही आदेश बाद में अंबाला डिविजनल कमिश्नर की अदालत में चुनौती दिया गया।

अपील में क्या दलील दी गई?

अपीलकर्ता आशा सिंह की ओर से कहा गया कि 4 जनवरी 2024 का आदेश पंचकूला के डिप्टी कमिश्नर के निर्देश पर पारित किया गया था और यह पूरी तरह अवैध तथा मनमाना था।

उन्होंने अदालत से मांग की कि इस आदेश को रद्द किया जाए और राजस्व रिकॉर्ड में पहले किए गए सुधारों को बहाल किया जाए।

डिविजनल कमिश्नर ने क्या कहा?

डिविजनल कमिश्नर ने अपने आदेश में कहा कि सरप्लस भूमि का निर्धारण करते समय पूरी जमीन को सरदार भगवंत सिंह की संपत्ति माना जाएगा, क्योंकि पंजाब सिक्योरिटी ऑफ लैंड टेन्योर एक्ट, 1953 उनके जीवनकाल में ही लागू हो चुका था।

कमिश्नर ने कहा कि कानून के अनुसार पूरी जमीन राज्य सरकार में निहित होती है और निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज म्यूटेशन को बनाए नहीं रखा जा सकता।

उन्होंने कलेक्टर एग्रेरियन, पंचकूला को मामले की दोबारा सुनवाई कर नया निर्णय लेने का निर्देश दिया।

क्या है हरियाणा का सीलिंग कानून?

हरियाणा सीलिंग ऑन लैंड होल्डिंग्स एक्ट, 1972 के तहत किसी व्यक्ति को सीमित मात्रा में ही कृषि भूमि रखने की अनुमति थी। जमीन की श्रेणी के अनुसार यह सीमा लगभग 18 एकड़ से 54.5 एकड़ तक तय की गई थी।

इस सीमा से अधिक जमीन को सरप्लस घोषित कर सरकार अपने अधिकार में ले सकती थी।

हालांकि 2011 में कानून में संशोधन किया गया, जिसके तहत शहरी क्षेत्रों में स्थित और गैर-कृषि उपयोग वाली कुछ जमीनों को सीलिंग कानून से छूट दे दी गई।

धारा 12(3) के अनुसार पंजाब और PEPSU कानूनों के तहत सरप्लस घोषित जमीन, जो पहले से सरकार में निहित नहीं हुई थी, वह भी राज्य सरकार के अधिकार में मानी जाएगी।


कीवर्ड्स: पंचकूला जमीन विवाद, हरियाणा सरकार जमीन मामला, पंचकूला प्राइम लैंड केस, हरियाणा सीलिंग ऑन लैंड होल्डिंग्स एक्ट, अंबाला डिविजनल कमिश्नर, पंचकूला म्यूटेशन केस, सरप्लस भूमि विवाद, सरदार भगवंत सिंह जमीन मामला, पंचकूला भूमि केस

स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स रिपोर्ट, राजस्व अदालत आदेश, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट रिकॉर्ड और आधिकारिक कार्यवाही।

“`

The Panchkula Pulse Editorial Team is responsible for curating and publishing verified news and updates across Panchkula, Chandigarh, and Mohali. The desk focuses on delivering factual, timely, and reader-first coverage, drawing from credible sources and on-ground developments to keep the community informed.

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2026 Panchkula Pulse. All Rights Reserved. Panchkula’s local digital news platform covering civic updates, public issues, local events, development, crime, politics, lifestyle and community stories.